रिपोर्ट:- अभिषेक कुमार
उपवास, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या अपनाकर शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने का संदेश
बस्ती। नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि, संयम और साधना का प्रतीक है। इस दौरान मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए योग, प्राणायाम, सात्त्विक आहार और प्राकृतिक जीवनशैली का विशेष महत्व है। विशेषज्ञों के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिन स्वस्थ आदतें अपनाने और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का बेहतर अवसर हैं।
आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर, बस्ती के निदेशक प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि नवरात्रि में उपवास रखने वाले लोगों को अपने खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए। फल, मौसमी सब्जियां, पर्याप्त पानी और सुपाच्य भोजन शरीर की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होते हैं। उपवास का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि संयम और संतुलन के साथ जीवनशैली को बेहतर बनाना होना चाहिए। इस दौरान लंबे समय तक भूखे रहने और अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
योग और प्राणायाम से मिलेगा मानसिक संतुलन
डॉ. नवीन सिंह के अनुसार, नवरात्रि के दौरान सुबह के समय योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास मानसिक शांति और सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक हो सकता है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ध्यान जैसी तकनीकों से तनाव कम करने तथा एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और हल्का व्यायाम भी स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी हैं।
प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने पर जोर
उन्होंने बताया कि स्वच्छ वायु, पर्याप्त जल, उचित विश्राम, सूर्य का प्रकाश और संतुलित आहार स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण आधार हैं। नवरात्रि में सात्त्विक भोजन के साथ सकारात्मक विचार, क्रोध पर नियंत्रण और मानसिक शांति का अभ्यास करने से पर्व की आध्यात्मिक भावना को जीवन में उतारा जा सकता है।
उपवास से पहले स्वास्थ्य का रखें ध्यान
डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि मधुमेह, गुर्दे की बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। प्राकृतिक चिकित्सा और योग स्वस्थ जीवनशैली के पूरक हैं, लेकिन इन्हें किसी गंभीर बीमारी के प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। यदि इन नौ दिनों में अपनाई गई अच्छी आदतों को पूरे वर्ष अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
संदेश: नवरात्रि में शक्ति की उपासना के साथ स्वास्थ्य की साधना करें, योग और सात्त्विक आहार अपनाएं तथा प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लें।
प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह
निदेशक, आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर, बस्ती


