करवा चौथ प्रेम, विश्वास और समर्पण का पावन पर्व : आस्था ज्योति सिंह एवं प्रो. डॉ. नवीन सिंह
पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, पारिवारिक सुख-समृद्धि और नारी सम्मान का देता है संदेश
बस्ती। भारतीय संस्कृति में करवा चौथ का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है। यह पर्व पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। आस्था ज्योति सिंह एवं प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह के अनुसार, करवा चौथ केवल व्रत और पूजा का त्योहार नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन में आपसी सम्मान, सहयोग और पारिवारिक एकता को मजबूत करने का अवसर भी है।
उन्होंने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले इस पर्व पर विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। इस अवसर पर करवा चौथ की कथा सुनने तथा बड़ों का आशीर्वाद लेने की भी परंपरा है।
आस्था ज्योति सिंह ने कहा कि वैवाहिक जीवन की मजबूती प्रेम, विश्वास, संवाद और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने से आती है। पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना चाहिए। नारी का सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मसम्मान केवल किसी त्योहार तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह देते हुए कहा कि व्रत के दौरान अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों तथा नियमित दवाएं लेने वालों को निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि करवा चौथ का वास्तविक संदेश प्रेम, समर्पण, परस्पर सम्मान और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने में निहित है। यही इस पावन पर्व की सच्ची भावना है।


